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रिलायंस और सऊदी अरामको oil-to-chemicals कारोबार में बदलने मंजूरी का आवेदन लिया वापस

रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने कहा कि वह अपने बिजनेस पोर्टफोलियो के विकासशील स्वरूप के चलते अपने तेल-से-रसायन कारोबार को एक अलग यूनिट में बदलने के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त करने के लिए अपने आवेदन को वापस ले रहा है।

कंपनी ने 19 नवंबर को देर शाम एक्सचेंज फाइलिंग में कहा कि RIL से O2C कारोबार को अलग करने के लिए एनसीएलटी के साथ मौजूदा आवेदन को वापस लिया जा रहा है।

RIL ने यह भी कहा कि उन्होंने सऊदी अरामको के साथ मिलकर ये तय किया है कि बदले हुए संदर्भ में O2C कारोबार में प्रस्तावित निवेश का पुनर्मूल्यांकन करना दोनों पक्षों के लिए फायदेमंद होगा। O2C कारोबार को अलग करने से बनी हुई नई कंपनी में सऊदी अरामको को हिस्सेदारी बेचने का रास्ता खुलेगा।

रिलायंस द्वारा जारी एक बयान में कहा गया “रिलायंस के बिजनेस पोर्टफोलियो के विकसशील स्वरूप के चलते रिलायंस और सऊदी अरामको ने आपसी समझ से ये तय किया है कि दोनों पक्षों के लिए बदले हुए संदर्भ O2C कारोबार में प्रस्तावित निवेश का पुनर्मूल्यांकन करना फायदेमंद साबित होगा। फलस्वरूप RIL से O2C कारोबार को अलग करने के लिए NCLT के पास किया गये वर्तमान आवेदन को वापस लिया जा रहा है। ”

RIL ने कहा कि वह भारत में निजी सेक्टर में निवेश के लिए Saudi Aramco का पसंदीदा पार्टनर बना रहेगा और ये सऊदी अरब राज्य के स्वामित्व वाली पेट्रोलियम और नैचुरल गैस कंपनी तथा सऊदी अरब में निवेश के लिए इसकी केमिकल मैनुफैक्चरिंग ऑफशूट (रसायन निमार्ण इकाई) SABIC के साथ सहयोग करेगा।

दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स ऑपरेटर RIL ने अगस्त 2019 में दुनिया के शीर्ष तेल निर्यातक Saudi Aramco के साथ 15 अरब डॉलर की डील का ऐलान किया था। Saudi Aramco के साथ हुई डील में O2C कारोबार में 20 प्रतिशत की हिस्सेदारी की बिक्री हुई थी जिसके मार्च 2020 तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन इसमें देरी हुई।

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